Friday, October 7, 2022
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आयुर्वेदिक ड्रग मैन्युफेक्चर एसोसिएशन का सम्मेलन,200 से ज्यादा दवा उत्पादक शामिल 

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करनाल/

हरियाणा आयुर्वेदिक दवाईयों का बड़ा उत्पादक और निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, कोरोना काल में लोगों का विश्वास आयुर्वेद में बढ़ने से आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं के हौसले बढ़े  हैं, करनाल में हरियाणा आयुर्वेदिक ड्रग मैन्युफेक्चर एसोसिएशन के वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया,  संघ ने सरकार और आयुष विभाग से उत्पादन और निर्यात से जुड़ी नीतियों में सुधार किए जाने की मांग की है।

आयुर्वेदिक ड्रग मैन्युफेक्चर एसोसिएशन के वार्षिक सम्मेलन में प्रदेश के कई जिलों से दो सौ से अधिक दवा उत्पादक शामिल हुए, सम्मेलन में आयुष विभाग पंचकूला के अधिकारी दलीप मिश्रा मुख्य अथिति के रूप में शामिल हुए। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अनूप भारद्वाज का कहना है कि, कोरोना काल में आयुर्वेदिक दवाईयां एलोपैथी का विकल्प बनी हैं, आयुर्वेदिक दवाई बनाने में रिसर्च और डॉक्टरों का योगदान बढ़ रहा है।जिससे विदेशों में भारतीय आयुर्वेदिक दवाईयों की डिमांड आ रही है, दवा उत्पादक अपने ग्रंथों और शास्त्रों के आधार पर आयुर्वेद को आगे ले जाने का काम कर रहे हैं। 
आयुष विभाग पंचकूला के अधिकारी दलीप मिश्रा ने बताया कि, सरकार और आयुष विभाग भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को बढ़ावा दे रहे हैं,   अब समय आया है कि भारतीय संस्कृति से जुड़े आयुर्वेद-एलोपैथी में सामंजस्य बने।जिससे लोग इलाज के लिए सिर्फ ऐलोपैथि पर निर्भर न रहें, कोरोना के इम्युनिटी बूस्टर के सफल परिणामों के बाद दवा उत्पादक गंभीर बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
‘आयुर्वेद के लिए सरकारी नीतियों में सुधार और प्रोत्साहन से लोगों को विकल्प मिल सकता है, वहीं, देश में निर्मित आयुर्वेदिक दवाएं पूरे विश्व में पहुचेंगी, भारतीय चिकित्सा पद्धति होने के बावजूद आयुर्वेदिक दवाओं के अंतर्राष्ट्रीय बाजार पर चीन के कब्जे को भारत टक्कर दे सकता है’। 

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