Tuesday, October 4, 2022
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Shaheed Nishant Malik Cremation : जवान पंचतत्व में विलीन, पिता ने दी मुखाग्नि

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इंडिया न्यूज, Haryana News: जम्मू-कश्मीर के राजौरी में कल आतंकवादियों के हमले में हरियाणा में हांसी के निशांत मलिक शहीद (Shaheed Nishant Malik) हो गए थे। शहीद का पार्थिव शरीर आज दोपहर को जवान के गांव ढंडेरी में पहुंचा। पार्थिव शरीर के पहुंचते ही सबकी आंखें नम हो गई।

जानकारी के अनुसार निशांत मलिक का पार्थिव शरीर शनिवार को गांव ढंडेरी में पहुंचा। जैसे ही शहीद का शव तिरंगे में लिपटा देखा तो सभी की आंखें भर आई। इस दौरान मां-बाप और बहन उससे लिपट गए।

निशांत मलिक अमर रहे के गगनभेदी नारे लगे

इस दौरान लोगों ने शहीद निशांत मलिक अमर रहे के गगनभेदी नारे लगाए। सुबह 9 बजे ही उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई थी। यह अंतिम यात्रा हांसी से शुरू हुई और उनके गांव तक निकली। रास्ते में शहीद पर लोगों ने फूल बरसाकर भारत माता की जयके नारे लगाए। शहीद के पिता ने तिरंगे को अपने माथे पर लगाया और इसके बाद करीब 1 बजकर 10 मिनट पर शहीद को मुखाग्नि दी गई।

निशांत ने बुधवार को घर की थी वीडियो कॉल

शहीद के पिता ने बताया कि निशांत दो साल पहले ही सेना में भर्ती हुआ था। निशांत 18 जुलाई को 45 दिनों की छुट्टीया काट कर आर्मी कैंप वापिस गए थे। उन्होंने बताया कि निशांत ने अभी बीए फाइनल इयर की परीक्षा दी। बुधवार शाम को निशांत ने वीडियो कॉल की थी। वीरवार की सुबह निशांत की बहन ने उनको फोन किया, लेकिन उसने किसी कार्य में व्यथ होने के कारण फोन रिसीव नहीं किया।

निशंत के पिता ने भावुक होकर बताया कि जब उन्हे पता सूचना मिली की उनका बेटा शहीद हो गया है। जयवीर मलिक ने बताया कि कारगिल युद्ध में गोली लगने पर उसे भी सेना ने सम्मानित किया। बेटे की भी इच्छा यहीं थी कि उसे भी सेना में सम्मान मिलें।

मुझे गर्व है मेरा बेटा देश के लिए शहीद हुआ: पिता

शहीद के पिता ने बताया कि उसकी तीन बेटियां है और एक बेटा था। उन्होंने बड़ी दो बेटियां की शादी कर दी है। उन्होंने कहा कि मुझे गर्व है कि मेरा बेटा देश के लिए शहीद हुआ है। निशांत के शहीद होने की खबर मिलते ही परिजनों में रक्षाबंधन के दिन मातम छा गया।

शहीद निशांत के पिता 18 साल के बाद सेना से रिटायर हुए थे। उन्हें कारगिल युद्ध के दाहिने बाजू पर गोली लगी थी। आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में आर्मी कैंप में एक समारोह का आयोजन किया गया था, जिसमें युद्ध के दौरान वे जख्मी हुए जवानों को सम्मानित किया गया था। वह इस कार्यक्रम में सम्मानित होकर लौटे तो उन्हे यह सूचना मिली। जयवीर ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनका बेटा देश के लिए शहीद हुआ।

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