Wednesday, February 1, 2023
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हरियाणा का प्रमुख कृषि जिला करनाल लगातार गिरते भूजल की समस्या से जूझ रहा

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हरियाणा का प्रमुख कृषि जिला करनाल लगातार गिरते भूजल की समस्या से जूझ रहा

ईशिका ठाकुर, करनाल।
करनाल भूजल समस्या समाचार: हरियाणा का प्रमुख कृषि जिला करनाल लगातार गिरते भू-जल की समस्या से जूझ रहा है। करनाल में भू-जल खतरनाक स्तर पर गिरता जा रहा है। यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो वह दिन दूर नहीं, जब आने वाली पीढ़ी को पीने के पानी के लिए भी मोहताज होना पड़ेगा।

वर्ष 2000 में था 8.57 मीटर जल स्तर

करनाल कृषि विभाग के भू-जल सेल से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पिछले दो दशक में करनाल का भू जल स्तर लगभग 12.86 मीटर से ज्यादा नीचे चला गया है। जिले की जल तालिका जोकि वर्ष 2000 में लगभग 8.57 मीटर थी और अब वर्तमान में यानि वर्ष 2021 में 21.81 मीटर हो गई है। आंकड़े के अनुसार सबसे तेज गिरावट 1999 के बाद शुरू हुई है। इसके पीछे बड़ा कारण यह सामने आ रहा है कि कृषि उत्पाद के लिए सबमर्सिबल ट्यूबवेल का प्रयोग बड़ी संख्या में होने लगा है। इसके साथ-साथ लोगों ने अपने घरों अथवा अस्पताल, स्कूल और होटल आदि बड़े संस्थानों में सबमर्सिबल पंप लगाने शुरू किए हुए हैं। इन सबके बीच खास बात यह है कि करनाल के इंद्री ब्लॉक को छोड़कर जिले में 7 ब्लॉक अति-शोषित श्रेणी में आ गए हैं।

सरकार के प्रयास भी नाकाफी

विशषज्ञों की मानें तो इस स्थिति के पीछे भूमि जल का अधिक प्रयोग और जल का कम संरक्षण माना जा रहा है। जल संरक्षण के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। इसके लिए लोगों के प्रयास और उनका जागरूक होना बेहद जरूरी है ताकि कृषि के लिए प्रयोग होने वाले पानी के साथ-साथ पीने के लिए भी आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी संचित किया जा सके और अगर हालात ऐसे ही चलते रहे तो आने वाली पीढ़ियों को पानी के लिय तरसना पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार करनाल जिले में हजारों अवैध बोरवेल हैं। बड़े बड़े प्रतिष्ठानों ने भी अधिसूचित क्षेत्रों में भूजल के निष्कर्षण की अवैध रूप से अनुमति ली है।

हरियाणा में स्वच्छ पानी की स्थिति हो सकती है काफी भयानक : डॉ. महावीर सिंह

करनाल ग्राउंड वॉटर सेल के तकनीकी अधिकारी डॉ. महावीर सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा जल के संरक्षण, प्रबंधन रेगुलेट करने के लिए हरियाणा जल संशाधन प्राधिकरण की स्थापना की गई है। करनाल में लगभग 90% भूजल का प्रयोग कृषि के लिए किया जा रहा है और 10% अन्य जरूरतों के लिए। भू-जल रिचार्ज के लिए पूरे जिले में लगभग 250 से 300 रिचार्ज स्ट्रक्चर अभी तक लगे हैं और जबकि पानी निकालने के लिए लगभग 70 हजार अलग-अलग साधनों का प्रयोग किया जा रहा है। पूरे हरियाणा में जहां पानी की गुणवत्ता अच्छी है वहां लगातार भू-जल नीचे जा रहा है जबकि जहां पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं है, वहां पानी का स्तर ऊपर उठता जा रहा है आने वाले समय में हरियाणा में भू-जल संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा और हरियाणा में स्वच्छ पानी की स्थिति काफी भयानक हो जाएगी।

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