Tuesday, October 4, 2022
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कृषि कानून रद्द कराने के लिए जाटु खाप ने निकाली डाक कांवड़ यात्रा

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बवानी खेड़ा/

हर साल सावन के महीने में हरिद्वार से गंगाजल लाकर शिव शंकर चरणों में परंपरा के अनुसार चढाया जाता है, लेकिन कोरोना महामारी  के चलते  सरकार ने कावड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, जिसके चलते बाबा भोले के भगत अब सावन में हरिद्वार नहीं जा पाऐ, तीनों कृषि कानूनों को रद्ध कराने को लेकर जाटु खाप–84 के गांवों से डाक कांवड़ लेकर टिकरी बॉर्डर पर पहुंचे, कुंगड गांव के बाद तालु गांव से युवाओं ने टिकरी बॉर्डर तक के लिए डाक कावड़ यात्रा शुरू की, और आने वाले दिनों में अन्य गांवाें से भी कावड़ यात्रा निकाली जाऐगी।

 गांव तालु में ग्रामीणों ने जहां जाटू खाप–84 के किसान आंदोलन के प्रधान रोहताश पहलवान की अध्यक्षता में एकत्रित हो तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग की,और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, इसके बाद महाराज सदानंद सरस्वती और दादरी विधायक सोमबीर सांगवान गांव के सबसे बुजूर्ग व्यक्ति ने युवाओं का गांव का मिट्‌टी–पानी देकर डाक कावड़ यात्रा को रवाना किया।

युवाओं में टिकरी बॉर्डर तक डाक कावड़ यात्रा को लेकर काफी जोश देखा गया, युवा हाथों में तिरंगा और गांव का मिट्‌टी–पानी लेकर किसान एकता और ईंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए दौड़ रहे थे, युवाओं के पीछे–पीछे गाड़ी में लगाऐ डीजे पर देशभक्ति गीत युवाओं में खासा जोश भरने का काम कर रहे थे।

इस दौरान युवाओं ने कहा कि पूरे तालु गांव ने फैसला किया था कि, अबकि बार हरिद्वार से कांवड़ लाने की बजाय, गांव का मिट्‌टी और पानी लेकर तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन स्थल टिकरी बॉर्डर तक डाक कावड़ की तर्ज पर ले जाया जाएगा, जिस पर गांव के युवाओं ने टिकरी बॉर्डर तक के लिए कावड़ यात्रा शुरू की है।

उन्होंने कहा कि युवा साथी पूरी तरह से किसान आंदोलन के साथ जुड़ गए हैं, और जब तक तीनों कानून रद्ध नहीं किए जाते तब तक आदोंलन में उनकी लगातार भागीदारी रहेगी, उन्होंने कहा कि अब टिकरी बॉर्डर किसान आंदोलन स्थल न होकर किसान धाम बन चुका है, आंदोलन जन–जन का आंदोलन बन चुका है, इसलिए अब सरकार को हर हाल में तीनों कानूनों को वापस लेना ही पड़ेगा।

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